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Essay on koyal in Hindi

कोयल पर हिंदी निबंध | Essay on koyal in Hindi (1000+ words)

मित्रो आज मैंने कोयल पर निबंध(Essay on koyal in Hindi) बहुत सरल भाषा में लिखा है। ये निबंध सभी छात्रों को ध्यान में रखकर के लिखा गया है। यह निबंध सभी छात्रों के लिए मददगार साबित होगा। अप्पको ये निबंध आपको बहुत पसंद आएगा। अगर आप इस निबंध को पूरा पढ़ते हो तो आपको कही और निबंध ढूंढ़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

Essay on koyal in Hindi- कोयल को उसकी मधुर आवाज के द्वारा ही जाना जाता है। कोयल की आवाज जितनी मधुर होती है, वह उतनी ही चालक होती है। कोयल कभी भी अपना घोसला स्वयं नहीं बनाती। ये दूसरे पक्षी के घोसले के अंडे खा जाती है और अपने अंडे रख देती है। कोयल कभी भी धरती पर नहीं उतरती ये हमेशा पेड़ो पर रहना पसंद करती है। कोयल को आम के पेड़ो पर रहना बहुत पसंद होता है।

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Essay on koyal in Hindi

कोयल पक्षी पर निबंध: Essay on koyal in Hindi [SHORT]

Essay on koyal in Hindi (300+ words)

प्रस्तावना:

हमारी दुनिया में पक्षियों की बहुत सारी प्रजातियां पायी जाती है और सभी पक्षियों की प्रजातियां अपने अपने गुण अवगुण के हिसाव से अलग अलग बटी हुई है। कुछ पक्षियाँ बहुत ज्यादा खूंखार होती है तो कुछ बहुत प्यारी होती है। कुछ से डर लगता है, तो कुछ को पालने का और प्यार करने का मन करता है। कुछ शाकाहारी होती है और कुछ मांसाहारी होती है। आज हम ऐसी पक्षी की बात करनी जा रहे जो की देखने में काली है लेकिन उसके अंदर के गुण सभी को प्रभाबित करते है- उस पक्षी का नाम है \’कोयल\’। कोयल अपनी मीठी आवाज से सभी का मन मोह लेती है।

कोयल:

कोयल छोटी और काले रंग की पक्षी होती है। कोयल कुछ-कुछ कौए के जैसी होती है लेकिन कोयल और कौए में बहुत फर्क होता है। कोयल अपनी आवाज के द्वारा ही जाने जाती है। कोयल की आवाज बहुत मधुर होती है, जो सभी का मन मोह लेती है। कोयल हम सब की बहुत प्यारी होती है। कोयल की आवाज से ही हमारे दिन की शुरुआत होती है। क्योकि कोयल रोज सुबह सुबह अपनी मधुर आवाज में गाती है। कोयल काली तो होती है, लेकिन बड़ी दिलवाली होती है। यह अपने मधुर आवाज से बहुत प्रसिद्ध है। इसे मीठी बोली वाला पक्षी भी कहा जाता है। यह लगभग सभी जगहो पर पायी जाती है। कोयल केवल वसंत ऋतु में ही कूकती है। कोयल झारखण्ड और पांडिचेरी का राजकीय पक्षी भी है। इसका भोजन फल और छोटे कीड़े मकोड़े होते है। यह एक बहुत ही चालक पक्षी है। यह अपने स्वयं के घोसले का निर्माण नहीं करती है। यह अपनी मधुर आवाज मन मोह लेती है।

कोयल पक्षी का औसत आयु 5 से 6 वर्ष की होती है। कोयल अधिकतर बड़े और ऊंचे पेड़ो पर रहती और इसका पसंदीदा पेड़ आम का पेड़ है। कोयल को अधिकतर सभी लोग देखना चाहते है लेकिन वह पेड़ में छिपी रहने के कारण किसी को दिखाई नहीं देती।

कोयल पक्षी पर निबंध: Essay on koyal in Hindi [LONG]

Essay on koyal in Hindi (600+ words)

कोयल एक भ्रमणशील छोटी चिड़िया होती है। यह वसंत में आती है और जाड़े के आने तक रहती है। इसकी आवाज बड़ी मधुर होती है। इनकी मीठी आवाज से ही लोग इन्हे जानते है और इन्हे मीठा पक्षी भी कहते है। इसका शरीर काले रंग का होता है। यह लोकप्रिय पक्षियों में से एक है। इन्हे लोग प्यार से कोकिला या कक्कू के नाम से भी पुकारते है। अधिकतर कोयल बाग़ में या बड़े बड़े पेड़ो पर रहती है। कोयल मुख्य रूप से भारत में पाए जाते है।

कोयल देखने में मध्य आकर की होती है। इसमें सबसे छोटी प्रजातियां का बजन लगभग 17 ग्राम का होता है और 6 इंच की लम्बाई होती है। इसमें सबसे बड़ी प्रजातियां का बजन लगभग 630 ग्राम का होता है और लम्बाई 25 इंच तक होती है। कोयल के पास एक लम्बी पूछ, उसके पंख और घूमवदार चोंच होती है, जिसका इस्तेमाल करके वह अपना जीवन यापन करती है।

पुरे विश्व में कोयल की लगभग 200 से अधिक प्रजातियां पाई जाती है। कोयल के दो पैर, दो आँख, एक पेनी चोंच और एक लम्बी पूछ होती है। इनकी आँखे लाल रंग की होती है, तथा मादा कोयल भूरा काले रंग और नर कोयल नीला काले रंग का होता है। नर कोयल की आवाज बहुत मधुर होती है, ये कुहू कुहू की आवाजे निकलता है। कोयल ज्यादातर वसंत ऋतु में दिखाई देते है। कोयल अपना घोसला स्वयं नहीं बनाती। मादा कोयल अपना अंडा दूसरे पक्षी के घोसले में देती है। कोयल का औसत जीवन काल लगभग 5 से 6 वर्षो का होता है।

कोयल और कौवे की पहचान करना कभी कभी कठिन होता है। कोयल और कौवे के रंग में और आकर में कभी कभी आश्चार्यजनक समानता देखने को मिलती है। लेकिन कोयल और कौवे की आवाज में धरती आसमान का फर्क होता है। इसलिय इनका पता चल पाता है की कौन कोयल है और कौन कोवा है।

कोयल अपने मधुर संगीत से पहाड़ और तलहटी को मंद मस्त कर देती है। इसके गाने से सभी आकर्षित हुए बिना नहीं रह सकते। इसके गाने में बड़ा दर्द छुपा होता है। इसका गाना पथ्थर दिल को भी पिंघला देता है। वैसे तो ये सालो तक जाती रहती है, किन्तु वसंत आते ही इसके कंठ में मधुर की ताल और बढ़ जाती है। कोयल का गाना बड़ा ही कर्ण प्रिय और दिल को आनंद देना बाला होता है। इसके गीत को बहुत सारे कवि ने अपनी कविता में वर्णन किये है। कोयल की आवाज मिश्री जैसी मीठी जैसी मीठी होती है।

कोयल एकांत और निर्जन जगह पर रहती है, जहा और इस तरह की कोई भी चिड़िया नहीं पाई जाती। कोयल की आवाज जितनी मीठी होती है वह उतनी ही चालक पक्षी होती है। कोयल दूसरे पक्षी के घोसले के अंडे खा जाती है और अपने अंडे रख देती है।

कोयल दुनिया में लगभग 120 तरह की होती है। इनमे से अधिकतर कोयल अपने अंडे दूसरे पक्षी के घोसले में देती है। कोयल कभी भी जमीन पर नहीं उतरती ये हमेशा पेड़ो पर ही रहती है। कोयल का रहने का स्थान जंगल है और जंगल में यह लगभग 6 साल जीती है। कोयल पक्षी में से केवल नर कोयल ही आवाज करता है।


10 Lines on Essay on koyal in Hindi

कोयल एक भ्रमणशील छोटी चिड़िया होती है।

यह वसंत में आती है और जाड़े के आने तक रहती है।

इसकी आवाज बड़ी मधुर होती है।

इनकी मीठी आवाज से ही लोग इन्हे जानते है और इन्हे मीठा पक्षी भी कहते है।

इसका शरीर काले रंग का होता है।

यह लोकप्रिय पक्षियों में से एक है।

इन्हे लोग प्यार से कोकिला या कक्कू के नाम से भी पुकारते है।

अधिकतर कोयल बाग़ में या बड़े बड़े पेड़ो पर रहती है।

कोयल मुख्य रूप से भारत में पाए जाते है।

ये दूसरे पक्षी के घोसले के अंडे खा जाती है और अपने अंडे रख देती है।


निष्कर्ष: (Essay on koyal in Hindi)

कोयल को उसकी मधुर आवाज के द्वारा ही जाना जाता है। कोयल की आवाज जितनी मधुर होती है, यह उतनी ही चालक होती है। कोयल कभी भी अपना घोसला नहीं बनाती। ये दूसरे पक्षी के घोसले के अंडे खा जाती है और अपने अंडे रख देती है। कोयल कभी भी धरती पर नहीं उतरती ये हमेशा पेड़ो पर रहना पसंद करती है। कोयल को आम के पेड़ो पर रहना बहुत पसंद होता है।

मेरी अंतिम बाते:– इस आर्टिकल में मैंने कोयल के ऊपर बहुत सरल भाषा में निबंध(Essay on koyal in Hindi) लिखा है। आशा करते है आपको ये निबंध पसंद आया होगा। आप एक बार हमारी वेबसाइट को खोल कर देख सकते है। इसमें आपको बहुत सारे निबंध देखने को मिलेंगे।

धन्यबाद

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