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jal hi jeevan hai essay in hindi

”जल ही जीवन है” पर निबंध (1500+ words) – jal hi jeevan hai essay in hindi

नमस्कार मित्रो, इस आर्टिकल में हमने ”जल ही जीवन है” पर एक सुन्दर निबंध लिखा है। यह निबंध सभी स्कूल के छात्रों के साथ साथ सभी तरह की competition परीक्षा के लिए बेहद फायदेमंद साबित होगा। इस निबंध को पढ़ने के बाद आपको कही और jal hi jeevan hai essay in hindi खोजने की जरूरत नहीं पड़ेगी।

”जल ही जीवन है” पर निबंध 300 शब्दों में ( for class 1 to 8 )

जल एक ऐसी बहुमूल्य वस्तु है। इसके बिना आदमी का जीवन संभव ही नहीं है। जल  भगवान का दिया हुआ ऐसा वरदान है।जो ना केवल पीने के काम आता है , इससे हम नहाने का, कपड़े धोनेे का, खाना पकाने का और साफ-सफाई का भी काम करते हैं। पानी ना केवल आम आदमी के लिए आवश्यक है बल्कि जानवरों और पशु- पक्षियों के लिए भी उतना ही आवश्यक है।

जल ही जीवन है‘ यह बात सत्य है, कि पानी के बिना इस पृृथ्वी पर जीवन यापन करना  मुश्किल है। 

पानी का मनुष्य के जीवन में बहुत अधिक महत्व है,  इसे नष्ट होने से बचाना हमारा धर्म है। जिस तरह सेे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। पृृथ्वी पर पानी की बचत नहीं की और  बर्बादी को नहीं रोका तो आने वाले समय में धरती पर पानी का नाम ही मिट जायेगा। 

जल को हमारे जीवन के लिए मूल्यवान कहा जाता है।   इसके बिना जीवन भी आसान नही है। जल है तो जीवन है। जल हमारी पृथ्वी में लगभग 71 प्रतिशत है।

हमारे पीने योग्य केवल 3 प्रतिशत ही पानी है। जिसे अलवणीय जल कहा जाता है, और इसका छोटा सा हिस्सा ही प्रयोग के लिए मौजूद है। अलवणीय जल की मौजूदगी समय और स्थान के अनुसार अलग-अलग होती हैं। जल के विकास के लिए जल का संरक्षण आवश्यक हो गया है। जल मनुष्य के लिए जरूरी होता है।  जल महज सेवन के लिए नहीं विभिन्न प्रकार के गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। 

”जल ही जीवन है” पर निबंध 1000 शब्दों में (long)

जल का परिचय :

जल एक ऐसी बहुमूल्य वस्तु है। इसके बिना आदमी का जीवन संभव ही नहीं है। जल  भगवान का दिया हुआ ऐसा वरदान है।जो ना केवल पीने के काम आता है , इससे हम नहाने का, कपड़े धोनेे का, खाना पकाने का और साफ-सफाई का भी काम करते हैं। पानी ना केवल आम आदमी के लिए आवश्यक है बल्कि जानवरों और पशु- पक्षियों के लिए भी ही आवश्यक है।

जल ही जीवन है‘ यह बात सत्य है, कि पानी के बिना इस पृृथ्वी पर जीवन यापन करना  मुश्किल है। 

पानी का मनुष्य के जीवन में बहुत अधिक महत्व है,  इसे नष्ट होने से बचाना हमारा धर्म है। जिस तरह सेे जल प्रदूषण बढ़ रहा है। पृृथ्वी पर पानी की बचत नहीं की और  बर्बादी को नहीं रोका तो आने वाले समय में धरती पर पानी का नाम ही मिट जायेगा। 

जल को हमारे जीवन के लिए मूल्यवान कहा जाता है।   इसके बिना जीवन भी आसान नही है। जल है तो जीवन है। जल हमारी पृथ्वी में लगभग 71 प्रतिशत है।

हमारे पीने योग्य केवल 3 प्रतिशत ही पानी है। जिसे अलवणीय जल कहा जाता है, और इसका छोटा सा हिस्सा ही प्रयोग के लिए मौजूद है। अलवणीय जल की मौजूदगी समय और स्थान के अनुसार अलग-अलग होती हैं। जल के विकास के लिए जल का संरक्षण आवश्यक हो गया है। जल मनुष्य के लिए जरूरी होता है।  जल महज सेवन के लिए नहीं विभिन्न प्रकार के गतिविधियों में इस्तेमाल होता है। 

जल की जरूरत हमें नियमित रूप होती है जल नदियों, तालाबों वर्षा के स्रोत से प्राप्त होता है। पृथ्वी पर अधिकांश जल समुंद्र में पाया जाता है। कुछ खारा होता है और कुछ बर्फीला होता है। इसका पानी उपयोग नही कर सकते हैं  समुद्र के जल में नमक की मात्रा बहुत अधिक होती है तथा समुद्र के जल से नमक बनाया जाता है जिसे हम लोग खाने में उपयोग करते हैं।

जल का महत्व :

जैसे पानी मनुष्य के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार से जानवरो, पेड़ पौधे और पृथ्वी के अन्य उसी सभी के लिए जरूरी है।  जल के बिना पृथ्वी पर जीवन नामुमकिन है।

कुछ फसलें ऐसी होती हैं। जिनकी पानी के बिना उपज नहीं होती हैं जैसे – गेहूं, चावल, मक्का आदि।  इसलिए जल की एक-एक बूंद को व्यर्थ होने से बचाना चाहिए क्योंकि जल है तो कल है।

जल का निर्माण कैसे होता है?

जल ऐसा पदार्थ है जो  हाइड्रोजन तथा ऑक्सीजन के अणुओं से मिलकर बनता है इसलिए जल का रासायनिक सूत्र भ्2व् है, सरल शब्दों में कहें हाइड्रोजन की एक ऑक्साइड के रूप में जब हाइड्रोजन या हाइड्रोजन योगिक जलते हैं या ऑक्सीजन का ऑक्सीजन यौगिकों के साथ में मिलते हैं  उसके बाद जल का निर्माण होता है। जल ऐसा पदार्थ है जिसके तीन रूप होते हैं – 

ठोस 

द्रव

गैस

भारत के जल संसाधन :

विश्व के धरातल का क्षेत्र लगभग 2.45 प्रतिशत जल संसाधनों का 4 प्रतिशत और जनसंख्या का लगभग 16 प्रतिशत भाग है। देश में 1 वर्ष में प्राप्त कुल जल की मात्रा  4,000 घन किलोमीटर है।

धरातलीय जल और  पूर्ति योग जल से 1,869 घन किलोमीटर जल मौजूद है। इसमें केवल कुछ प्रतिशत जल का इस्तेमाल किया जा सकता है। देश में जल संसाधन 1,122 घन किलोमीटर है।

जल के स्रोत :

पृथ्वी पर जल के चार प्रमुख स्रोत है। नदिया, झीले, तलैया, तालाब। देश में कुल नदिये तथा सहायक नदियों की लंबाई 1.6 कि.मी. से अधिक है। सभी नदियों को मिलाकर 10,360 नदियां हैं।  सभी नदी बेसिनो में औसत वार्षिक प्रवाह 1,869 घन किलोमीटर में होने कल्पना की गयी है।

जलीय और अन्य दबावों के कारण प्राप्त  जल का केवल  690 घन कि.मी. (32ः) जल का ही इस्तेमाल किया जा सकता है। नदियां जैसे गंगा, ब्रह्मपुत्र और सिंधु के जल  क्षेत्र बहुत विस्तृत हैं। गंगा, ब्रह्मपुत्र  नदियों के जल ग्रहण क्षेत्र में वर्षा अधिक होती है। 

नदियां  देश के कुल क्षेत्र के लगभग एक तिहाई भाग पर पाई जाती हैं। जिनमें कुल जल संसाधनों का 60 प्रतिशत जल पाया जाता है। दक्षिण भारतीय नदियां जैसे – गोदावरी, कृष्णा और कावेरी में जल का अधिकतर भाग काम में लाया जाता है।  ब्रह्मपुत्र, और गंगा, नदियो  में  संभव नहीं हो सका है

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जल का प्रयोग और जरूरत

 भारत एक कृषि प्रधान देश है और  जनसंख्या का दो – तिहाई हिस्सा कृषि पर निर्भर है। पंचवर्षीय योजना में कृषि की उपज को बढ़ाने के लिए सिंचाई को एक अति उच्च प्राथमिकता की गई है।

बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना जैसे – भाखड़ा नांगल, हीराकुंड, दामोदर, घाटी, परियोजना, नागार्जुन सागर, परियोजना, इंदिरा गांधी, नहर परियोजना आदि। पृथ्वी का भूजल सबसे अधिक कृषि में उपयोग किया जाता है।  जल का 89 प्रतिशत और भूजल का 92 प्रतिशत जल का प्रयोग  किया जाता है। औद्योगिक सेक्टर में जल केवल 2 प्रतिशत और भूजन का 5 प्रतिशत भाग ही उपयोग में किया जाता है।

धरातलीय जल का प्रयोग भूजल की तुलना में 9 प्रतिशत जल के क्षेत्र में कृषि का हिस्सा अधिक है फिर भविष्य में  औद्योगिक और घरेलू सेक्टर में जल का इस्तेमाल बढ़ाने की संभावना है। 

विश्व जल दिवस

22 मार्च को  विश्व जल दिवस मनाया जाता है।  देश के स्थानों पर विभिन्न प्रोग्राम किए जाते हैं.। यह दिवस 1933 से मनाई जा रही है। इस दिन को उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के विकसित देशों को  जल की उपलब्धता के साथ जल के महत्व पर भी ध्यान देना है।

जल उपयोग किन राज्यों में अधिक है

पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, और तमिलनाडु, राज्यों में जल का प्रयोग बहुत अधिक है।  कुछ राज्यो में छत्तीसगढ़ उड़ीसा केरल आदि जल का कम प्रयोग करते हैं।

गुजरात, उत्तर प्रदेश, बिहार, त्रिपुरा, और महाराष्ट्र  आदि जल संसाधनों का द्वारा उपयोग कर रहे हैं।  

उपसंहार : jal hi jeevan hai essay in hindi

पृथ्वी पर पानी की मात्रा सीमित है और इसकी सूचना सभी को होनी चाहिए क्योंकि जल ही जीवन है जल के बिना जीवन नामुमकिन है  हमें इसके महत्व को समझाना चाहिए । 

 सरकार और कई संस्थाएं भी अभियान से जागरूकता फैला रहे हैं।पानी बचत के कार्यक्रम में पूरा-पूरा सहयोग देते हुए पानी की बचत करनी चाहिए। इसके महत्व को समझे और जल की बचत करना सीखो।, जल है तो हम है, जल है तो जीवन है।

कहा जाता है कि आप भोजन के बिना 21 दिन तक जिंदा रह सकते हैं जल के बिना 100 घंटे 3 से 4 दिन और वायु के बिना 5 मिनट।  हमारे जिंदा रहने के लिए वायु के बाद जल अधिक उपयोगी है।

अंतिम शब्द- इस आर्टिकल में आपने jal hi jeevan hai essay in hindi पढ़ा। आशा करते है, आपको ये निबंध पसंद आया होगा। इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करके उनकी मदद जरूर करे।

FAQ’S

जल ही जीवन है पर निबंध कैसे लिखें?

जल एक ऐसी बहुमूल्य वस्तु है। इसके बिना आदमी का जीवन संभव ही नहीं है। जल  भगवान का दिया हुआ ऐसा वरदान है।जो ना केवल पीने के काम आता है , इससे हम नहाने का, कपड़े धोनेे का, खाना पकाने का और साफ-सफाई का भी काम करते हैं। पानी ना केवल आम आदमी के लिए आवश्यक है बल्कि जानवरों और पशु- पक्षियों के लिए भी उतना ही आवश्यक है।

जल हमारे लिए क्यों जरूरी है?

जैसे पानी मनुष्य के लिए आवश्यक है, उसी प्रकार से जानवरो, पेड़ पौधे और पृथ्वी के अन्य उसी सभी के लिए जरूरी है।  जल के बिना पृथ्वी पर जीवन नामुमकिन है।

पहला जल दिवस कब मनाया गया था?

22 मार्च को  विश्व जल दिवस मनाया जाता है।  देश के स्थानों पर विभिन्न प्रोग्राम किए जाते हैं.। यह दिवस 1933 से मनाई जा रही है। इस दिन को उत्साह के साथ मनाया जाता है। इसका उद्देश्य विश्व के विकसित देशों को  जल की उपलब्धता के साथ जल के महत्व पर भी ध्यान देना है।

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