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Mere dadaji essay in hindi

मेरे दादा जी पर निबंध | Mere dadaji essay in hindi

मेरे प्यारे मित्रो, मैने मेरे दादा जी पर निबंध(Mere dadaji essay in hindi) बहुत ही सरल भाषा में लिखा है। ये निबंध सभी तरह के छात्रों के लिए बहुत फायदेमंद है।मैने इस पोस्ट में दादा जी के ऊपर वो सब कुछ लिखा है, जो आपके काम आएगा।

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Mere dadaji essay in hindi

Mere dadaji essay in hindi [Short]

Mere dadaji essay in hindi (300 words)

मेरे दादा का नाम श्री मन्नू सिंह राठी है। वह जिला बिजनौर के हरचंदपुर गांव में रहते है। उनकी उम्र लगभग 65 वर्ष की है। वे हमारे घर के मुखिया है। वह गांव के 3 बार प्रधान रह चुके है। मेरे दादा को लोग प्यार से प्रधान जी कहते है। मेरे दादा जी मुझे बार बार आशीर्वाद देते है। मेरे दादा जी की आदत बहुत अच्छी है, वे हर किसी से हस बात करते है। मेरे दादा जी मुझे रोज रात को कहानी भी सुनाते है। जब दादाजी कही घूमने या किसी काम के लिए बहार जाते है, तब मेरे मन नहीं लगता। मेरे दादा जी मुझे घर में सबसे ज्यादा प्यार करते है। दादा जी के बिना घर सुना सुना लगता है। मेरे दादाजी मुझे हर समय सही रस्ते पर चलने के लिए प्रेरित करते रहते है। दादा जी हमेसा कहते है, की कभी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। मेरे दादा जी एक आदर्श इंसान है, जो हमेशा सही रास्ता चुनते है। मेरे दादा जी से मिलने के लिए बहुत से लोग आते है। मेरे दादा जी रोज सुबह व्यायाम करते है, जिससे वे स्वस्त रहते है। मेरे दादा जी मेरे सबसे पहले दोस्त है, क्योकि वे मेरे साथ खेलने वाले पहले इंसान है। हम एक दूसरे के साथ समय बिताना बहुत पसंद करते है। हम दोनों साथ में कार्टून और कॉमेडी देख कर खूब हस्ते है। हम साथ में वीडियो गेम भी खेलते है। मैं रोज रात को उनके साथ अपने पुरे दिन की बात शेयर करता हूँ।

दादा जी का मेरे साथ होना एक अलग ही अहसास कराता है। मेरे दादा जी मुझे अपने साथ हर बार मेला दिखने भी ले जाते है। जब भी मेरे स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग होती है, तो मैं अपने दादा जी को ले जाता हु। अपने दादा जी के आदेश को कभी नहीं टालता क्योकि वे मेरे लिए भगवान् के जैसे है।

मैं अपने दादा जी से बहुत प्यार करता हु लेकिन मैं उनसे ये बात नहीं कह पाता। मैं हमेशा अपने दादा जी के साथ रहना चाहता हु कभी भी उन्हें खोना नहीं चाहता।

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Mere dadaji essay in hindi [Long]

Mere dadaji essay in hindi (600 words)

प्रस्तावना: Mere dadaji essay in hindi

जिसे हम अपने जीवन में सबसे ज्यादा प्यार करते है, वो हमारे पास रहे तो हमारी आधी चिंता अपने आप ख़त्म हो जाती है। इसी प्रकार जब मैं अपने दादा जी को देखता हु और अपने पास पाता हूँ तो मैं अपने सभी टेंशन भूल जाता हूँ। मेरे दादा जी मेरे लिए सब कुछ है।

दादा जी के बारे में

मेरे दादा जी का नाम श्री शिवध्यान सिंह है। उनकी उम्र 70 साल की है। मेरे दादा जी पुरे परिवार के मुखिया है। मेरे दादा जी बहुत अच्छे और साफ़ मन के इंसान है। वे कभी भी किसी का बुरा नहीं करना चाहते। बचपन से ही मैं अपने दादा जी के साथ पला बड़ा हुआ हूँ। इसलिए मुझे अपने दादा जी से बहुत ज्यादा लगाव है। सभी पोता पोती में से दादा जी मुझे सबसे ज्यादा प्यार करते है। मेरे दादा जी की मूँछ बड़ी बड़ी है। दादा जी हमेशा बाजार में से मेरे लिए कुछ न कुछ लाया करते है। मेरे दादा जी मुझे कभी कभी अपने साथ बाजार भी ले जाया करते है। दादा जी हमेशा कुरता पजामा पहनना पसंद करते है। मेरे दादा जी रोज सुबह शाम पूजा करते है। दादा जी रोज सुबह उठकर टहलने के लिए जाते है। दादा जी को चाय पीना बहुत पसंद है। दादा जी मुझे रोज तरह तरह के लोगो के बारे में बताते है। दादा जी को हम अधिकतर समय हस्ते हुए देखते है। लेकिन कभी कभी को दादा जी को बहुत ज्यादा गुस्सा आता है, उनके गुस्से के सामने कोई नहीं आता। दादा जी बड़ी बड़ी बैठक में जाते है और अपना फैसला सुनते है। कभी कभी दादा जी बिलकुल बच्चो वाली हरकत करते है। दादा जी का मेरे साथ होना एक अलग ही अहसास कराता है। मेरे दादा जी मुझे अपने साथ हर बार मेला दिखने भी ले जाते है। जब भी मेरे स्कूल में पेरेंट्स मीटिंग होती है, तो मैं अपने दादा जी को ले जाता हु। अपने दादा जी के आदेश को कभी नहीं टालता क्योकि वे मेरे लिए भगवान् के जैसे है।

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दादा जी का ज्ञान

मेरे दादा जी एक पढ़े लिखे इंसान है। दादा जी मेरी पढाई में भी मेरी मदद करते है। दादा जी ज्ञान से भरे हुए इंसान है और हम सब को बहुत कुछ सिखाते है। दादा जी हमें सिखाते है की समाज में किस तरह रह जा सकता है, हमे दुसरो का कभी बुरा नहीं करना चाहिए , सभी को एक निगाह से देखना चाहिए , माता पिता और अपने से बड़ो का सम्मान करना चाहिए, आदि। दादा जी हमें एक सही रास्ता चुनना का ज्ञान देते है। दादा जी सबको एक साथ रहने के लिए भी प्रेरित करते है।

10 lines on Mere dadaji essay in hindi

मेरे दादा जी का नाम श्री शिवध्यान सिंह है।

मेरे दादा जी पुरे परिवार के मुखिया है।

उनकी उम्र लगभग 65 वर्ष की है।

मेरे दादा जी की आदत बहुत अच्छी है, वे हर किसी से हस बात करते है।

मेरे दादा जी रोज सुबह व्यायाम करते है, जिससे वे स्वस्त रहते है।

दादा जी का मेरे साथ होना एक अलग ही अहसास कराता है।

मेरे दादा जी एक पढ़े लिखे इंसान है।

मेरे दादा जी रोज सुबह शाम पूजा करते है।

अपने दादा जी के आदेश को कभी नहीं टालता क्योकि वे मेरे लिए भगवान् के जैसे है।

मैं अपने दादा जी से बहुत प्यार करता हु

निष्कर्ष : (Mere dadaji essay in hindi)

जिस बच्चे को माँ बाप का प्यार और आशीर्वाद मिलता है, वो बहुत किस्मत वाला होता है और जिसे माता पिता के साथ साथ दादा और दादी का प्यार और आशीर्वाद मिले वो तो खुश किस्मत और भागीयशली होता है। क्योकि सभी को सबका प्यार नहीं मिलता है। दादा का होना घर में अलग ही प्रभाव डालता है। दादा जी घर की मुसीबत को आराम से निपटा देते है। एक दादा ही होते है, जो पेरेंट्स के आलावा दोस्त भी बनते है।

इस आर्टिकल में हमने आपको मेरे दादा जी पर निबंध(Mere dadaji essay in hindi) बहुत सरल भाषा में बताया है, आशा करते है आपको ये निबंध पसंद आया होगा। अगर पसंद आया होगा तो आप इसे अपने फेसबुक या व्हाट्सप्प पर शेयर कर सकते है।

धन्यवाद

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